शराबबंदी पर निबंध स्प््. ⬅️⬅️Click
कहा जा सकता है कि आज शराबबंदी के लिए जोरदार ढंग से आन्दोलन चलाने की आवश्यकता है । इसके लिए व्यक्ति और समाज दोनों को ही ‘मोबलाइज’ होना पड़ेगा क्योंकि शराबबंदी के लिए साहस व दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है । यदि एक वार लोगों की शराब पीने की आदत छूट गई तो उनका नैतिक चरित्र फिर से बन सकता है और अपराधों में भी कमी लाई जा सकती है ।
नशा क्या है और इसकी शुस्वात कब, कैसे और क्यों होती है ? क्या हमने सामूहिक रुप ये इस अहम मुद्दे पर कभी सोचने या चिन्तन करने की ईमानदारी से जरूरत समझी है ? ऐसा लगता है कि अभी तक नशेबन्दी पर गम्भीरता से बहुत कम सोचा गया है । क्या कभी हम सबने यानि प्रबुद्ध वर्ग ने यह सोचा है कि दिन पर दिन नशे की लत क्यों बढ़ती जा रही है ?
क्या वजह है कि हम अपने समाज में पुरुषों, महिलाओं, किशोर और नौजवान पीढी को गर्त में जाते हुये देख रहे हैं ? कहीं कोई साजिश जरूर है । इस साजिश का पता लगाना और नशे की लत से मुक्त समाज के लिए पहल जरूरी है ।
पहल हम सबको मिलकर करनी होगी । यह सच्चाई है कि मादक पदार्थों के नशे के लती, समाज के बीच तिरस्कृत होते है और उन्हे घृणा की दृष्टि से देखा जाता है । इस तरह हर नशे के लती को जब पूणा से देखा जाता है तो निश्चित ही इसका प्रभाव उसकी मनोदशा पर पडता होगा और उसे धक्का लगता होगा ।
यही वजह है कि नशेबाज हमेशा समाज से कटा रहता है और उसका अपना समाज नशेबाजों का ही होता है । स्नेह और हमदर्दी के मोहताज ये नशेबाज गर्त में गिरते ही चले जाते हें । आखिर वे कौन से कारण हैं जो नशे का लती बनाकर हमारी पीढियों को नष्ट कर रहे हैं । मीडिया से जुडे लोगो का दायित्व है कि इन कारणों का पता लगायें ।
शराब सिर्फ एक नशा ही नहीं बल्कि परिवार की सुख-शान्ति और उसकी अर्थ-व्यवस्था के लिए भी खतरनाक है । शराब की लत लग जाने पर एक आदमी परिवार को, समाज को तथा अपने आप को भूल जाता है तथा वह अपराध कमी की ओर आसानी से प्रवृत्त होता है ।
दूसरी तरफ शराब सरकार के लिए राजस्व प्राप्ति का एक बड़ा साधन है । इसलिये शराबबंदी लागू करने के बारे में सरकारों में हिचकिचाहट होती हे लेकिन यह एक साहस का काम है क्योंकि शराबबन्दी से जो घाटा होगा उसे पूरा करने के लिए कोई दूसरा रास्ता तलाशना पड़ेगा फिर भी समाज की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि घाटा सह कर भी सरकार को शराब पर रोक लगानी चाहिए और समाज को बर्बाद होने से बचाना चाहिए ।
मदिरापान से खोखले हो रहे समाज को बचाने के लिए आज जरूरी है कि शराब पर एक राष्ट्रीय सोच कायम हो ताकि इस बुराई से जड़ से छुटकारा पाया जा सके । युवाओं में शराब के बढ़ते उपयोग से नयी पीढ़ी का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य इस कदर दुष्प्रभावित हो गया है कि सेना और सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए निर्धारित मापदंडों में वह पूरी तरह नहीं उतर पा रही है ।
यह भी गंभीर प्रश्न है कि शराबखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण नष्ट हो रही युवा पीढी के कारण हमारी सैन्य ताकत भी आने वाले समय में उतनी नहीं रहेगी जितनी कि अब तक रही है । शराब ने सबसे ज्यादा नुकसान पारिवारिक जीवन और सामाजिक रिश्तों को पहुंचाया है । शराब की दुःखदायी प्रवृत्ति के चलते जहा हजारों परिवार टूटकर बिखर गये हैं, वहीं शराबजनित अपराधों में भी लगातर वृद्धि हो रही है । ✔✔✔✔
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कहा जा सकता है कि आज शराबबंदी के लिए जोरदार ढंग से आन्दोलन चलाने की आवश्यकता है । इसके लिए व्यक्ति और समाज दोनों को ही ‘मोबलाइज’ होना पड़ेगा क्योंकि शराबबंदी के लिए साहस व दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है । यदि एक वार लोगों की शराब पीने की आदत छूट गई तो उनका नैतिक चरित्र फिर से बन सकता है और अपराधों में भी कमी लाई जा सकती है ।
नशा क्या है और इसकी शुस्वात कब, कैसे और क्यों होती है ? क्या हमने सामूहिक रुप ये इस अहम मुद्दे पर कभी सोचने या चिन्तन करने की ईमानदारी से जरूरत समझी है ? ऐसा लगता है कि अभी तक नशेबन्दी पर गम्भीरता से बहुत कम सोचा गया है । क्या कभी हम सबने यानि प्रबुद्ध वर्ग ने यह सोचा है कि दिन पर दिन नशे की लत क्यों बढ़ती जा रही है ?
क्या वजह है कि हम अपने समाज में पुरुषों, महिलाओं, किशोर और नौजवान पीढी को गर्त में जाते हुये देख रहे हैं ? कहीं कोई साजिश जरूर है । इस साजिश का पता लगाना और नशे की लत से मुक्त समाज के लिए पहल जरूरी है ।
पहल हम सबको मिलकर करनी होगी । यह सच्चाई है कि मादक पदार्थों के नशे के लती, समाज के बीच तिरस्कृत होते है और उन्हे घृणा की दृष्टि से देखा जाता है । इस तरह हर नशे के लती को जब पूणा से देखा जाता है तो निश्चित ही इसका प्रभाव उसकी मनोदशा पर पडता होगा और उसे धक्का लगता होगा ।
यही वजह है कि नशेबाज हमेशा समाज से कटा रहता है और उसका अपना समाज नशेबाजों का ही होता है । स्नेह और हमदर्दी के मोहताज ये नशेबाज गर्त में गिरते ही चले जाते हें । आखिर वे कौन से कारण हैं जो नशे का लती बनाकर हमारी पीढियों को नष्ट कर रहे हैं । मीडिया से जुडे लोगो का दायित्व है कि इन कारणों का पता लगायें ।
शराब सिर्फ एक नशा ही नहीं बल्कि परिवार की सुख-शान्ति और उसकी अर्थ-व्यवस्था के लिए भी खतरनाक है । शराब की लत लग जाने पर एक आदमी परिवार को, समाज को तथा अपने आप को भूल जाता है तथा वह अपराध कमी की ओर आसानी से प्रवृत्त होता है ।
दूसरी तरफ शराब सरकार के लिए राजस्व प्राप्ति का एक बड़ा साधन है । इसलिये शराबबंदी लागू करने के बारे में सरकारों में हिचकिचाहट होती हे लेकिन यह एक साहस का काम है क्योंकि शराबबन्दी से जो घाटा होगा उसे पूरा करने के लिए कोई दूसरा रास्ता तलाशना पड़ेगा फिर भी समाज की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि घाटा सह कर भी सरकार को शराब पर रोक लगानी चाहिए और समाज को बर्बाद होने से बचाना चाहिए ।
मदिरापान से खोखले हो रहे समाज को बचाने के लिए आज जरूरी है कि शराब पर एक राष्ट्रीय सोच कायम हो ताकि इस बुराई से जड़ से छुटकारा पाया जा सके । युवाओं में शराब के बढ़ते उपयोग से नयी पीढ़ी का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य इस कदर दुष्प्रभावित हो गया है कि सेना और सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए निर्धारित मापदंडों में वह पूरी तरह नहीं उतर पा रही है ।
यह भी गंभीर प्रश्न है कि शराबखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण नष्ट हो रही युवा पीढी के कारण हमारी सैन्य ताकत भी आने वाले समय में उतनी नहीं रहेगी जितनी कि अब तक रही है । शराब ने सबसे ज्यादा नुकसान पारिवारिक जीवन और सामाजिक रिश्तों को पहुंचाया है । शराब की दुःखदायी प्रवृत्ति के चलते जहा हजारों परिवार टूटकर बिखर गये हैं, वहीं शराबजनित अपराधों में भी लगातर वृद्धि हो रही है । ✔✔✔✔
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Bahut achha aasise hi dictation dete rahe
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